महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारियों के मद्देनजर शनिवार को 22वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के ए-समवाय पतलावा और राहत-बचाव दल ने संयुक्त रूप से नदी गश्त की। इस दौरान नदी के जल प्रवाह, संभावित कटान वाले स्थानों तथा बाढ़ की स्थिति में आवागमन के वैकल्पिक मार्गों का निरीक्षण किया गया।
एसएसबी के अनुसार, दोपहर एक बजे से तीन बजे तक संयुक्त नदी गश्त अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य नदी क्षेत्र की संवेदनशीलता का आकलन करना और आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करना रहा।
गश्त के दौरान नदी एवं उसके आसपास के संभावित कटान वाले स्थानों का बारीकी से जायजा लिया गया। अधिकारियों और जवानों ने संवेदनशील स्थानों को चिह्नित करने के साथ ही बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर नदी तक पहुंचने के लिए सुरक्षित एवं सुविधाजनक मार्गों का भी चयन किया। इससे आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य को शीघ्रता से संचालित करने में मदद मिलेगी।
संयुक्त गश्त का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नदी के रास्ते होने वाली संभावित तस्करी की गतिविधियों पर नजर रखना भी रहा। जवानों ने नदी के किनारे तथा आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर ऐसे संभावित स्थानों की पहचान की, जहां से तस्करी की गतिविधियां संचालित हो सकती हैं। तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए संभावित नाका बिंदुओं का भी चयन किया गया।
गश्त में एसएसबी की ओर से निरीक्षक (सामान्य) अरुण कुमार पांडेय, सहायक उपनिरीक्षक (सामान्य) धनंजय बरमन सहित दो अन्य जवान शामिल रहे। वहीं राहत-बचाव दल की ओर से मुख्य आरक्षी (सामान्य) राकेश कुमार यादव सहित तीन अन्य सदस्य मौजूद रहे।
एसएसबी अधिकारियों ने बताया कि नदी क्षेत्र में नियमित निगरानी के साथ संवेदनशील स्थानों पर सतर्कता बनाए रखी जा रही है, ताकि बाढ़ अथवा किसी अन्य आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। साथ ही सीमा क्षेत्र में नदी मार्ग से होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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