नवलपरासी/बिहार। सुस्ता गांवपालिका क्षेत्र के अंतर्गत त्रिवेणी नदी का रास्ता इन दिनों कथित रूप से अवैध सामान की आवाजाही को लेकर चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही सूचनाओं के अनुसार, नदी के रास्ते कद्दू बीज, चाइनीज लहसुन, मक्का और सिगरेट जैसी वस्तुओं की कथित तस्करी किए जाने की बात कही जा रही है। दावा है कि नदी मार्ग से सामान को बिहार के वाल्मीकिनगर क्षेत्र तक पहुंचाया जाता है, जहां कथित तौर पर पिकअप वाहनों पर इसकी लोडिंग कर आगे भेजा जाता है।
बताया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क में नदी का रास्ता महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सामान की आवाजाही के बाद वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पिकअप वाहनों पर लोडिंग की चर्चा ने सीमा क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नदी और सड़क दोनों रास्तों से नियमित रूप से सामान की आवाजाही हो रही है तो संबंधित सुरक्षा एवं निगरानी एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीमा क्षेत्र में निगरानी के बावजूद कथित रूप से सामान नदी के रास्ते कैसे पहुंच रहा है और वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पिकअप पर लोडिंग तक कैसे हो रही है? क्या इस पूरे रूट पर नियमित निगरानी हो रही है? क्या आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जा रही है? और यदि जांच हो रही है तो फिर ऐसी गतिविधियों की सूचनाएं लगातार सामने क्यों आ रही हैं?
स्थानीय सूत्रों के दावों के मुताबिक, नदी मार्ग से आने वाले सामान को व्यवस्थित तरीके से आगे भेजे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में किसी व्यक्ति या एजेंसी पर सीधे आरोप लगाने के बजाय निष्पक्ष जांच जरूरी है।
जांच एजेंसियों को त्रिवेणी नदी से लेकर वाल्मीकिनगर तक पूरे कथित रूट की निगरानी और जांच करनी चाहिए। यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि सामान कहां से आता है, किस माध्यम से नदी पार कराया जाता है, किस स्थान पर पिकअप में लोड होता है और इसके बाद इसकी आपूर्ति कहां तक होती है।
यदि जांच में तस्करी की पुष्टि होती है तो मामला केवल प्रतिबंधित या अवैध सामान की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सीमा क्षेत्र में निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। फिलहाल निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इन दावों को लेकर क्या कदम उठाती हैं।
जांच एजेंसियों से सीधे सवाल ________&
- अगर त्रिवेणी नदी के रास्ते सामान की कथित आवाजाही हो रही है, तो निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं है?
- नदी से वाल्मीकिनगर तक कथित तस्करी के इस रूट पर नियमित निगरानी और गश्त कितनी प्रभावी है?
- पिकअप वाहनों पर कथित रूप से माल की लोडिंग हो रही है तो इन वाहनों की जांच क्यों नहीं हो रही?
- कद्दू बीज, चाइनीज लहसुन, मक्का और सिगरेट की कथित आवाजाही को रोकने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई?
- क्या संबंधित एजेंसियों ने त्रिवेणी नदी से वाल्मीकिनगर तक के पूरे रूट को चिन्हित कर जांच की है?
- यदि ऐसी गतिविधियों की सूचनाएं पहले से मिल रही हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या सीमा क्षेत्र में सक्रिय किसी संभावित नेटवर्क की पहचान के लिए खुफिया स्तर पर जांच की जा रही है?
- आखिर नदी मार्ग से सामान की कथित आवाजाही और वाल्मीकिनगर में पिकअप पर लोडिंग की बात सामने आने के बावजूद निगरानी व्यवस्था पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
अब देखना यह है कि इन सवालों पर संबंधित जांच एजेंसियां क्या जवाब देती हैं और कथित तस्करी के इस पूरे रूट की जांच कब तक शुरू होती है।
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