एमआईएस के बाद समय से एफटीओ जनरेट नहीं होने से भुगतान में देरी, मेहनत की कमाई के लिए जिम्मेदारों के चक्कर काट रहे श्रमिक
महराजगंज। गरीब परिवारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने वाली विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना के तहत काम करने वाले श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नौतनवा विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में योजना के तहत काम करने वाले हजारों श्रमिकों की मजदूरी करीब डेढ़ माह से लंबित है। आगामी त्योहारों को देखते हुए मजदूरी का भुगतान नहीं होने से श्रमिक परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
नौतनवा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में श्रमिकों ने तालाब खुदाई, चकरोड निर्माण, नाली निर्माण, मिट्टी भराई सहित अन्य कार्यों में कई दिनों तक मेहनत की। कार्य पूरा होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि निर्धारित समय के भीतर मजदूरी उनके बैंक खातों में पहुंच जाएगी, लेकिन डेढ़ माह बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हो सका है। ऐसे में श्रमिक अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए बैंक से लेकर संबंधित विभागीय कार्यालयों तक चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
श्रमिकों का कहना है कि मजदूरी उनके परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों का प्रमुख सहारा है। समय पर पैसा नहीं मिलने से घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई, दवा और अन्य जरूरी खर्च प्रभावित हो रहे हैं। त्योहार सिर पर होने के बावजूद मजदूरी नहीं मिलने से परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है। कई श्रमिकों ने जल्द भुगतान की मांग करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार लगाई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित कार्यों का एमआईएस (मास्टर रोल/मजदूरी संबंधी प्रक्रिया) होने के बाद समय से एफटीओ (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) जनरेट नहीं होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, सवाल यह है कि यदि योजना में मजदूरी भुगतान के लिए समय-सीमा निर्धारित है तो प्रक्रिया में इतनी लंबी देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
योजना के प्रावधानों के अनुसार मजदूरी का भुगतान सामान्यतः एक सप्ताह के भीतर किए जाने का लक्ष्य है। किसी भी स्थिति में मस्टर रोल बंद होने की तारीख से अधिकतम 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान किया जाना चाहिए। इसके बावजूद डेढ़ माह से भुगतान लंबित रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब श्रमिकों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। उनका कहना है कि त्योहार से पहले यदि लंबित मजदूरी खातों में पहुंच जाए तो परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और हजारों श्रमिकों की मेहनत की कमाई का भुगतान कब तक सुनिश्चित कराया जाता है।
जनपद के सभी 12 विकासखंड—बृजमनगंज, धानी, परतावल, पनियरा, लक्ष्मीपुर, घुघली, मिठौरा, नौतनवा, फरेंदा, निचलौल, सदर और सिसवा—में योजना के तहत कराए गए कार्यों से जुड़े श्रमिकों के भुगतान को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। इनमें निचलौल व नौतनवा विकासखंड में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है, जहां विभिन्न ग्राम पंचायतों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों की मजदूरी करीब डेढ़ माह से लंबित है।
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